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नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, के जयकारों से गूंजा पंडाल 

साहू धर्मशाला में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव

नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की, के जयकारों से गूंजा पंडाल

 

साहू धर्मशाला में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव

सागर गढ़ाकोटा से राजेंद्र साहू की रिपोर्ट

 

 

गढ़ाकोटा । साहू धर्मशाला में चल रही संगीतमय श्रीमद भगवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास पं पुष्पेंद्र जी महाराज

 

भागवत कथा में कृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ, जेल के ताले टूट गये। पहरेदार सो गये। बाल गोपाल का जन्म देवकी और वासुदेव के आठवें संतान के रूप में हुआ है। देवकी व वासुदेव के अर्थ को आगे समझाते हुए कहा कि देवकी यानी जो देवताओं की होकर जीवन जीती है और वासुदेव का अर्थ है, जिसमें देव तत्व का वास हो। ऐसे व्यक्ति अगर विपरीत परिस्थितियों की बेड़ियों में भी क्यों न जकड़े हों, भगवान को खोजने के लिए उन्हें कहीं जाना नहीं पड़ता है, बल्कि भगवान स्वयं आकर उसकी सारी बेड़ी-हथकड़ी को काटकर उसे भवसागर से मुक्त करा दिया करते हैं।

भागवत कथा में श्री कृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। जन्म होते ही भक्त जमकर झूमे। कंस ने वासुदेव के हाथ से कन्य रूपी शक्तिरूपा को छीनकर जमीन पर पटकना चाहा तो वह कन्या राजा कंस के हाथ से छूटकर आसमान में चली गई। शक्ति रूप में प्रकट होकर आकाशवाणी करने लगी कि कंस, तेरा वध करने वाला पैदा हो चुका है।

उधर नंद बाबा के यहां बधाइयों को तांता लग गया। भक्तों ने भगवान का जन्मोत्सव धूम-धाम के साथ मनाया व भजनों पर नृत्य किया।।कथा के दौरान जैसे भगवान का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल ‘ नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की ‘ के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान लोग झूमने-नाचने लगे एक दूसरे को रंग गुलाल लगाया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। भक्तों ने पुष्प वर्षा की ।

यजमान शिव प्रसाद साहू एवं श्रीमती रामबाई है। आयोजक सुमित साहू, आचार्य पंडित राघवेंद्र ववेले, हैं।

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